Friday, February 26, 2010
ईश्वर
सबने शामिल कर लिया है
तुम्हें
अपने-अपने ज़ेहाद में
और तुम्हें पता ही नहीं चला
यार
कैसे अंतर्यामी हो...!
तुम्हें
अपने-अपने ज़ेहाद में
और तुम्हें पता ही नहीं चला
यार
कैसे अंतर्यामी हो...!
Sunday, October 19, 2008
कस्बे का कवि....!
मैं मणिमोहन, छोटे से कस्बे गंज बासौदा में रहता हूँ... मूलतः कवि हूँ... हिंदी में कविताएँ लिखता हूँ... हिंदी की कुछ प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के लिए अनुवाद भी पिछले दिनों किया... हाल ही में तीन कविताएँ कोलकाता से निकलने वाली वागार्थ में भी छपी हैं... कस्बे की तासीर से ज़िंदगी के तमाम रंगों को समेटती कविताएँ अब इस मंच पर ...
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