Sunday, June 6, 2010

गिरगिट

रंग बदल रहा है
गिरगिट
पेड़ पर बैठा हुआ
जबड़ों से ज्यादा खतरनाक हैं
उसके रंग
हरे पत्तों के बीच
एकदम हरियल हो जाता है
जमीन तक आते-आते
एकदम भूरा
पेट भर चुका है उसका
घर लौट रहा है गिरगिट
शाम के पाँच बजे हैं अभी
पता नहीं
किस रंग में
प्यार करेगा अपनी मादा को
पता नहीं किस रंग में
चूमेगा अपने बच्चों को
जाने
किस रंग में
घर
लौट रहा है गिरगिट.

2 comments:

आचार्य जी said...

आईये जानें .... मन क्या है!

आचार्य जी

Udan Tashtari said...

गिरगिटों की दुनिया...बेहतरीन अभिव्यक्ति!